Welcome, Guest   [ Register | Sign In | Take a tour | Adult Filter: On ]

टैग्स: विविध


ब्लॉग्स (5)
सारा जीवन मेरा राम का जैसे वनवास हो गया ।कुटिल खल कामियों के लिए जैसे परिहास हो गया..मेरा यह प्रयत्न रहा सबको प्रसन्न करूं मैंहो छोटे चाहे बड़े सबको नमन करूं मैंखाली हाथ न जाने पाये कोई मेरे व्दारे सेहो भूखा चाहे प्यासा सबको तर्पण करूं मैंसबकी आवभगत करने ... आगे पढ़ें...

मैं कर्म यज्ञ में निज की आहूति देता हूं.......मैं ही यजमान मैं ही यज्ञ का होता हूं........पसन्द नहीं है उसको फूल पत्ती और गुलकन्दवह भूखा तड़पता होता और वे खा रहे होते कलाकन्दआंसू पोंछ कर गले स्नेह से लगाना पर्याप्त हैहवन कर निज का दुःख दारिद्र मिटाना ... आगे पढ़ें...